संत कबीर साहेब
संत कबीर साहेब
पंद्रहवीं सदी के एक महान कवि और संत कबीर दास जी का जीवन अनेकों रहस्यों से भरा है।
कोई उन्हें भगवान की संज्ञा देता हैं..!!
तो कोई उन्हें केवल मात्र एक महान संत कहता है..!
और आज हम इन्हीं में छिपे सत्य को जानने की कोशिश करेंगे।
संत कबीर दास पंद्रहवीं सदी के भक्ति कालीन युग के एक महान काव्य धारा के प्रवर्तक थे उनकी रचनाओं ने हिंदी प्रदेश में भक्ति आंदोलन को गहरे स्तर तक प्रभावित किया है। तथा उन्होंने बहुत सी सामाजिक और रूढ़िवादी परंपराओं का विरोध किया। तथा इस वजह से उस समय में उनका बहुत से हिंदू और मुस्लिम लोग विरोध किया करते थे।
परंतु वास्तव में तो कबीर दास एक महान विचारक और श्रेष्ठ समाज सुधारक थे। उनके उपदेश आज भी सद मार्ग की ओर प्रेरित करने वाले हैं। उनके द्वारा प्रवाहित की गई वह ज्ञान की धारा आज भी सबको पावन करती है। संत कबीर दास संत परंपरा में सबसे निराली और अलग दिखाई देते थे। परंतु एकमात्र कबीर दास जी ऐसे संत थे। जिन पर हिंदू मुसलमान दोनों समुदायों ने अपना होने का प्रबल दावा किया। कहा जाता है कि मरणोपरांत उनकी अस्थियां भी दोनों संप्रदायों ने बांट ली थी। अर्थात वे किसी संप्रदाय विशेष के लिए नहीं परंतु पूरे मानव समुदाय के लिए एक महान संत और विचारक थे।
संत कबीर या परमेश्वर
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कबीर दास जी ही पूर्ण परमात्मा है इसका उल्लेख हिंदू धर्म में और दूसरे धर्मों के ग्रंथो में प्रमाण सहित है।
1. यजुर्वेद अध्याय 5 मन्त्र 32 में लिखा है कि जो परम सुखदायी, पाप का नशा कर सकता है, जो बंधनो का शत्रु अर्थात बन्दी छोड़ है, वह "कविरसि" कबीर है। स्वयं प्रकाशित अर्थात तेजोमय शरीर वाला सत्यलोक में निवास करता है।सब भगवानों का भगवान अर्थात सर्वशक्तिमान सम्राट यानि महाराजा है।
2. ऋज्ञवेद मण्डल न. 9 सूक्त 86 मन्त्र 26 में कहा है कि अपने निज लोक से गति करता हुआ आता है सशरीर पृथ्वी पर आता है, नेक आत्माओ को मिलता है।भक्तो के संकटो का नाश करता है। उसका नाम कविर्देव अर्थात कबीर परमेश्वर है।
3. ऋज्ञवेद मण्डल न. 9 सूक्त 96 मन्त्र 17 में कहा है परमात्मा स्वयं पृथ्वी पर प्रकट होकर तत्वज्ञान प्रचार करता है।कविर्वाणी (कबीर वाणी) कहलाती है। सत्य आध्यात्मिक ज्ञान (तत्वज्ञान) को कबीर परमात्मा लोकोक्तियों, दोहों, शब्दो, चौपाइयों व कविताओं के रूप में पदों में बोलता है।
4. ऋज्ञवेद मण्डल न. 9 सूक्त 94 मन्त्र 1 में कहा है कि परमात्मा पृथ्वी पर कवियों की तरह आचरण करता हुआ विचरण करता है।
ऋगवेद मण्डल 9 सूक्त 96 मन्त्र 17 से 20 में प्रमाण है कि पूर्ण परमात्मा कविर्देव (कबीर परमेश्वर) शिशु रूप धारण करके प्रकट होता है तथा अपना निर्मल ज्ञान अर्थात तत्वज्ञान (कविर्गीर्भी:) कबीर वाणी के द्वारा अपने अनुयायियों को बोल-बोल कर वर्णन करता है। वह कविर्देव ब्रह्म के धाम तथा परब्रह्म के धाम से भिन्न जो पूर्ण ब्रह्म का तीसरा सतलोक है। उसमे आकार रूप में विराजमान है तथा सतलोक से चौथा अनामी लोक है उसमें भी यही कविर्देव अनामी पुरुर्ष के रूप में मानव सदृश आकार में विराजमान है।
ऋगवेद मण्डल 9 सूक्त 1 मन्त्र 9 में कहा है कि जिस समय अमर पुरुष (सोम) जी शिशु रूप में पृथ्वी पर प्रकट होते है तो उनकी पोषण की लीला (व्यवस्था) कंवारी गायों द्वारा होती है।
परमात्मा 3 प्रकार का शरीर धारण करके आते है।
1. ऋग्वेद मण्डल न. 9 सूक्त 1 मन्त्र 8 में लिखा है कि उस परमात्मा को उग्र गतिया प्रेरणा करती है और भासमान शरीर को वह परमात्मा प्राप्त होता है जिसमें तीन प्रकार से दूसरों को वारण करने वाला मधुमय शरीर प्राप्त होता है।
2. ऋग्वेद मण्डल न. 9 सूक्त 67 मन्त्र 26 में लिखा है कि परमात्मन् ! हे ज्ञानस्वरूप ! हे सर्वोत्पादक ! हे दिव्य गुणसम्पन्न परमात्मन् ! आप तीन शरीरों से जो श्रेष्ठ है तथा दक्षतायुक्त है उससे हम लोगो को पवित्र करिए।
ऋगवेद मण्डल 9 सूक्त 82 मन्त्र 1में जो सर्वोउत्पादक प्रभु प्रकाश स्वरूप ,सद्गुणों की वृष्टि करने वाला ,पापो को हरण करने वाला हैं।वह राजाके समान दर्शनीय है। वह वरणीय पुरुष जो दृढ़ भक्त है उसको पवित्र करता हुआ प्राप्त होता है।
ऋगवेद मण्डल 9 सूक्त 82 मन्त्र 2 में लिखा है कि हे परमात्मन् उपदेश करने की इच्छा से आप महापुरुषों को प्राप्त होते है और आप अत्यंत गतिशील पदार्थ के समान हमारे यज्ञों को प्राप्त होते है। आप कविर्देव है। हमारे पापों को दूर करके हे परमात्मा आप हमें सुख दे।
ऋग्वेद मंडल न. 1 सूक्त 1 मन्त्र 5 के अनुसार सर्व सृष्टि रचनहार कुल का मालिक कविर्देव अर्थात कबीर दास जी ही परमात्मा है जो तेजोमय शरीर युक्त है और सैकड़ो के लिए पूजा के योग्य है।जिसकी प्राप्ति तत्वदर्शी सन्त के बताए भक्ति मार्ग से विकार रहित(देवस्वरूप) भक्त को होगी।
कबीर दास जी ही है पूर्ण परमात्मा है जिसने साऱी सृष्टि की रचना करी है जिसकी चाह समस्त प्राणी को है इशलिये सभी धर्मो के ग्रंथो में कबीर नाम से ही उस परमात्मा की महिमा बताई है जिनका प्रमाण इस प्रकार है_
क़ुरान शरीफ में प्रमाण
सूरत फुर्कानि 25 आयत 52 से 59 में कबीर साहेब को कबीरन /खबीरन आदि कहा गया है।
गुरु ग्रंथ साहिब में प्रमाण
गुरुग्रंथ साहिब पृष्ठ नं 721 महला 1
गुरुग्रंथ साहिब के राग "सिरी"महला 1 पृष्ठ नं 24
श्रीमद्भगवद्गीता में अध्याय 18 श्लोक 62 में गीता ज्ञान दाता कह रहे हैं कि हे अर्जुन तू सर्व प्रकार से उसे पूर्ण परमात्मा की शरण में जा...!! जिस की भक्ति करने से तू सनातन परमधाम को प्राप्त होगा अर्थात उस सतलोक के मोक्ष स्थान को प्राप्त होगा।
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संतो की वाणी में प्रमाण👇👇
कबीर परमेश्वर जी
ए स्वामी सृष्टा मैं, सृष्टि हमारे तीर।दास गरीब अधर बसूं, अविगत सत्य कबीर।।
सोलह संत पर हमारा तकिया,गगन मण्डल के जिन्दा।
हुक्म हिसाबी हम चल आये,कटान यम के फंदा।।
हम है सत्यलोक के वासी,दास कहाये प्रगट भये काशी।
नहीं बाप ना माता जाये, अब गतिही से हम चल आये।।
गुरु नानक जी
यक् अर्ज गुफ्तम् पेस तो दर गोस कून करतार्।
हक्का(सत्त)कबीर करीम तू बेएब परवरदीगार।।
संत दादू दास जीएप
कबीर कर्ता आप हैं,दूजा नाहिं कोए।
दादू पूरण जगत को,भक्ति दृढावत सोए।।
अबही तेरी सब मिटे, जन्म मरण की पीर।
स्वांस उस्वांस सुमिरले, दादू नाम कबीर।।
संत गरीबदास जी
अनंत कोटि ब्रह्मण्ड का,एक रति नहीं भार।
सतगुरु पुरुष कबीर हैं,कुल के सृजनहार।।
अनंत कोटि ब्रह्माण्ड में बंदी छोड़ कहाये।
सो तो एक कबीर हैं जननी जने न माये।।
उपरोक्त सभी प्रमाणों से हम ये कह सकते हैं कि पूर्ण परमेश्वर कबीर साहेब ही है। तथा उन्होंने आज से 600 वर्ष पूर्व कई चमत्कार किए थे और इस समाज को यह संदेश देना चाहते थे कि सद्भक्ति का वह मार्ग तो बहुत ही आसान है। जो हमें पूर्ण मोक्ष दिलाने में सहायक है। तथा उस सत भक्ति और सत मार्ग को जानने के लिए सतगुरु की आवश्यकता है। और वह सतगुरु आज के समय में तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज हैं।
मोक्ष के इस अनमोल मार्ग को जानने के लिए अवश्य देखें साधना टीवी चैनल शाम 7:30 से 8:30 तक
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Deletegreat work
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